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प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत को बापू और देश की जनता को समर्पित किया

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2019 को स्वच्छ भारत को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश की जनता को समर्पित किया।

गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए देश भर से पहुंचे 20,000 स्वच्छाग्रहियों एवं सरपंचों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के तहत एक सघन व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम के माध्यम से खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या साल 2014 में 60 करोड़ से घटकर आज नगण्य हो गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया में खुले में शौच करने वाले लोगों के 60% हिस्से को कम करके भारत ने एसडीजी6 की वैश्विक उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर, 2019 को एक साफ और खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) भारत महात्मा गांधी को उनकी 150वीं जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने स्वच्छता को एक जन-आंदोलन बनाने के मिशन के आह्वान पर लाखों स्वच्छाग्रहियों द्वारा किए गए कार्यों को सलाम किया और इस जन आंदोलन को लेकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सभा को झुककर नमन किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस आयोजन के साबरमती रिवर फ्रंट पर होने के अपने मायने हैं, क्योंकि इसी साबरमती आश्रम में बापू ने सत्याग्रह और स्वच्छाग्रह, दोनों के लिए अपना जीवन खपाया। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वच्छाग्रह की सफलता इतिहास को दोहरा रही है, यह बहुत कुछ सत्याग्रह की सफलता की तरह है, क्योंकि ये दोनों ही जन भागीदारी के सिद्धांत पर आधारित थे।

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह उपलब्धि स्वच्छ भारत की दिशा में महज एक कदम है, जो अब तक हुई प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही एक सतत प्रक्रिया होगी और यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी पीछे न छूटे। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। सरकार ने इसके लिए 3.5 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का चलन रोकने के लिए एक साथ काम करने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समूचा अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब स्वच्छता के एक सफल मामले के अध्ययन के रूप में भारत को उदाहरण के तौर पर देख रहा है। उन्होंने कहा कि गेट्स फाउंडेशन द्वारा भारत को दिए गए ग्लोबल गोलकीपर अवॉर्ड ने भारत को स्वच्छता के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में विश्व मानचित्र पर मजबूती से खड़ा कर दिया है।

इस अवसर पर अपने स्वागत भाषण में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने स्वच्छता को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा दिखाई गई प्रतिबद्धता और देश भर में इस मिशन को लागू करने के लिए सरकार द्वारा किए गए नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस मिशन की सफलता का सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं गरिमा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और यह दुनिया के लिए अनुकरणीय उदाहरण के तौर पर स्थापित होगा।

इस कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से ही भारत में ग्रामीण स्वच्छता के दायरे में जबरदस्त वृद्धि हुई है। यह अक्टूबर 2014 में 39% से बढ़कर सितंबर 2019 में 100% हो गया है। इस मिशन के तहत 10 करोड़ से ज्यादा घरों में शौचालयों का निर्माण हुआ है। इसके परिणामस्वरूप 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 699 जिलों और 599,963 गांवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है।

इस अवसर पर गुजरात में 20,000 से ज्यादा सरपंच और स्वच्छाग्रही (गामीण इलाकों में प्रेरक) जुटे। मुख्य कार्यक्रम से दो दिन पहले (30 सिंतबर – 1 अक्टूबर) 20,000 प्रतिभागी ‘गांधी ट्रेल’ में शामिल हुए और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एवं डांडी नमक सत्याग्रह स्मारक का दौरा किया। इसके साथ ही ये लोग जल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में गुजरात द्वारा विभिन्न जगहों पर अपनाई जा रही सर्वश्रेष्ठ प्रक्रियाओं के भी गवाह बने।

लोगों को संबोधित करने से पहले प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत प्रदर्शनी का अवलोकन किया और स्वच्छता गीत एवं स्वच्छ भारत लेजर फिल्म जारी की। उन्होंने बापू की 150वीं जयंती के अवसर पर स्मारक डाक टिकट एवं सिक्के जारी किए और इस मिशन में असाधारण योगदान के लिए 11 स्वच्छ भारत पुरस्कार प्रदान किए।

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