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सातवें गुरू एम.एल.कौसर नृत्य और संगीत फेस्टिवल में श्रोता हुए भावविभोर

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कला एवं संस्कृति के प्रचार एवं प्रसार को समर्पित संस्था प्राचीन कला केन्द्र भारतीय कलाओं के प्रचार प्रसार एवं विकास करने का अग्मय कार्य बहुत लगन से पिछले 60 दशकों से लगातार करता आ रहा है । केन्द्र के मुख्य उदेश्यों में से कला के प्रचार एवं प्रसार हेतु देश के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन करने का कार्य केन्द्र 60वर्षो से करता आ रहा है । इसी लड़ी में देश की राजधानी दिल्ली में पिछले 6 वर्षो से केन्द्र अपने संस्थापक गुरू एम.एल.कौसर की भावभीनी याद में इस खूबसूरत कार्यक्रम का आयोजन करता आ रहा है । इस कार्यक्रम में अब तक कई दिग्गज कलाकार अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को रोमांचित कर चुके हैं । ये कार्यक्रम अब दिल्ली के मुख्य कार्यक्रमों की सूची में अपना नाम बना चुका है । इसी सफलता के आयाम के साथ इस वर्ष भी केन्द्र ने देश के सधे हुए कलाकारों को संजो कर इस समारोह को चार चांद लगाए हैं । इस दो दिवसीय समारोह का आयोजन दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम सभागार में सायं 6 30 बजे से किया गया ।  मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफैसर सौभाग्य वर्धन ,  निदेशक , NCZCC, Patiala   ने शिरकत की । केन्द्र की रजिस्ट्ार डॉ.शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर ने मुख्य अतिथि के साथ दीप प्रज्वलन की रस्म अदा की ।

कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति दिल्ली के जाने माने सितार वादक सुब्राता डे विशनुपुर घराने से सम्बन्ध रखते हैं । इन्होंने पंडित मृणाल नाग से संगीत की शिक्षा प्राप्त की । सुब्राता डे ने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन किया है । इन्होंने प्राचीन कला केन्द्र की भास्कर ड्गि के अलावा मानव संसाधन मंत्रालय से स्कॉलरशिप भी प्राप्त की है ।

दूसरी और मलिक बंधु ध्रुपद घराने से सम्बन्धित है और इन्होंने संगीत की प्रारम्भिक शिक्षा अपने पिता श्री प्रेम कुमार मलिक से प्राप्त करने के पश्चात ध्रुपद गायन की बारीकियों को अपने दादा पंडित विधुर मलिक से सीखा । मलिक बंधुओं ने अपनी सोज भरी आवाज से कला जगत में विशेष पहचान बनाई है । मलिक बंधु दूरदर्शन के ए ग्रेड आर्टिस्ट भी हैं । इन्होंने देश और विदेशों में अपनी कला का जादू बिखेरा है ।

आज के कार्यक्रम की शुरूआत सुब्राता डे के सितार से हुई जिसमें उन्होंने राग चारूकेशी से कार्यक्रम की शुरूआत की । इन्होंने आलाप के बाद जोड़, झाला की बेहतरीन प्रस्तुति दी । इन्होंने विलम्बित तीन ताल,मध्य लय,चार ताल की सवारी तथा द्रुत तीन ताल का उत्कृष्ट प्रदर्शन करके दर्शकों की वाहवाही बटोरी । कार्यक्रम का समापन राग मिश्र पीलू में निबद्ध राग मलिका से करके सुब्राता डे ने यादगारी शाम को संजोया । इनके साथ मंच पर उस्ताद अकरम खां ने तबले पर संगत करके अपनी जादुई प्रस्तुति से दर्शकों को बॉंध लिया । तानपूरे पर शिखा सिन्हा ने संगत की ।

सितार की मधुर धुनों के बाद मलिक बंधुओं ने मंच संभाला । जिसमें उन्होंने सबसे पहले राग बागेश्री में आलाप,जोड़ एवं झाला की खूबसूरत प्रस्तुति देकर दर्शकों को सहज ही खुद से बॉध लिया । इसके पश्चात चार ताल की बंदिश ‘‘तुम हो करूणा निधान’’ से खूब तालियां बटोरी । कार्यक्रम का समापन इन्होंने राग चारूकेशी में निबद्ध तीवरा ताल से सजे कबीर के पदों से किया जिसके बोल थे ‘‘कुछ लेना न देना मगन रहना। इस प्रस्तुति से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए । इनके साथ मंच पर गौरव शंकर उपाध्याय ने पखावज पर बखूबी साथ देकर कार्यक्रम को और भी खूबसूरत बना दिया।

दूसरे दिन कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति  पंडित चेतन जोशी  के बासुरी बादन से हुयी जिसमे उनके साथ तबले  पर संगत की पंडित रामकुमार मिश्रा जी ने  पंडित चेतन जोशी  ने अपने बादन का प्रारम्भ राग गौरव कल्याण  में आलाप से किया तत्पश्चात इन्होने विलम्वित रूपक ताल तथा मध्य लय तीन ताल में बंदिश प्रस्तुत की इनके साथ तबले पर पंडित रामकुमार मिश्रा ने संगत की

कार्यक्रम की दूसरे भाग में ज्योति श्रीवास्तव ने मंगल चरण से कार्यक्रम की शुरुवात की जिसमे उन्होंने भगवन जगन्नाथ की स्तुति अपने नृत्य की द्वारा प्रस्तुत की राग मेघमल्हार पर की गई इस रचना को दर्शको ने बहुत सराहा कार्यक्रम का समापन गीतगोविन्द की अष्टपड़ी द्वारा किया गया जिसमे राधा कृष्णा की अनन्य प्रेम को नृत्य की माध्यम से प्रदर्शित किया गया इस प्रस्तुति में नृत्य और भाव का मनमोहक प्रदर्शन कबीले तारीफ था

 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने दर्शकों,गणमान्य अतिथियों एवं मीडिया का धन्यवाद किया तथा मुख्य अतिथि प्रोफैसर सौभाग्य वर्धन , केन्द्र की रजिस्ट्ार डॉ.शोभा कौसर , श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया

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