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क्या व्यापारी बिगाड़ेंगे लोकसभा चुनाव में सीटों का गाड़ित ?

देश के 19 राज्यों की 195 लोकसभा सीटों पर व्यापारियों की निर्णायक भूमिका

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देश भर में व्यापारियों की समस्याएं सरदार पटेल की ऊँची मूर्ती जैसी है जिनके कारण देश भर का व्यापारी बेहद परेशांन हैदेश के करोड़ों व्यापारी और अपनी आजीविका के लिए उन पर निर्भर रहने वाले लोग आगामीचुनावों में देश के 19 राज्यों की 195 लोकसभा सीटों पर निर्णायक साबित हो सकते हैं और इस दृष्टि से चुनावों में व्यापारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है और इसी लिए देश भर में व्यापारी एकजुट होकर एकवोट बैंक के रूप में परिवर्तित हो रहे हैं ! कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)द्वारा पुडुचेरी में हाल ही में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में 26 राज्यों के 200 से अधिक व्यापारी नेताओं ने सभी राज्यों मेंसीटों का गहन आंकलन करने के बाद यह निष्कर्ष निकला है !

इन 195 सीटों में राजधानी दिल्ली की 3 सीटें चांदनी चौक,नई दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली, उत्तर प्रदेश में 33 , राजस्थान में 11 , गुजरात में 13 , महाराष्ट्र में 21 , मध्य प्रदेश में 14 , छत्तीसगढ़ में 4 ,पश्चिम बंगाल में 16 ,उत्तर पूर्वी राज्यों में 7 , झारखण्ड में 6 , बिहार में 15 , तमिलनाडु में 16 , तेलंगाना में 3 , आंध्र प्रदेश में 4 , केरल में 5 , उड़ीसा में 7 , हरयाणा में 4 , पंजाब में 3 , कर्णाटक में 10 सीटें हामिल हैं जिन पर व्यापारियों कावर्चस्व है और व्यापारियों के वोट निर्णय कर सकते हैं की उस क्षेत्र का सांसद कौन बनेगा !

इन सीटों में प्रमुख रूप से लखनऊ , वाराणसी, कानपुर, झाँसी, पुणे, नागपुर, अकोला, कोल्हापुर, सूरत, बड़ोदा, जामनगर, भुवनेश्वर, गौहाटी, कलकत्ता, मिदनापुर , सिलीगुड़ी, आसनसोल, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर रांची,जमशेदपुर, रायपुर, चेन्नई, मदुरै, कोइम्बटोरे, बंगलोर, हैदराबाद, तिरुपति, कोचीन , लुधिअना, चंडीगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत , मुजफ्फरपुर, जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, अलवर आदि शामिल हैं ! इन195 सीटों में लगभग 70% शहरी क्षेत्र में है जबकि 30 % अर्ध ग्रामीण अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में है !

एक अनुमान के अनुसार इन सीटों पर कुल मतदाताओं में से लगभग 40% मतदाता व्यापारी और उन पर निर्भर लोग एवं उनका परिवार है जबकि देश में अन्य लगभग 40 सीटों पर 15 से 20% प्रतिशत व्यापारीमतदाता होने के कारण उन सीटों पर भी व्यापारी चुनाव परिणाम प्रभावित कर सकते हैं ! व्यापारियों की दुकाने किसी भी कानाफूसी अभियान के लिए एक सही जगह हैं जहाँ से किसी भी दल के बारे में अच्छा बुरा कहकर राय कायम की जा सकती हैं! देश भर में फैली प्रत्येक दूकान में साधारणत : लगभग 30 खरीदार प्रतिदिन आते हैं जिनमें से लगभग 40% खरीदार रोज़ नए होते हैं और लगभग 60% खरीदार पुराने होते हैं ! यदिव्यापारी अपने खरीदारों से बातों बातों में कानाफूसी करके किसी भी दल की अच्छाई या बुराई करें तो खरीदार के दिमाग पर उसका असर होता है और किसी भी दल के बारे में राय कायम की जा सकती है ! वर्षों पहले येकाम पान की दुकानों , चाय की दुकानों तथा हलवाई की दुकानों पर होता था जहाँ चुनाव के बारे में चर्चाएं होती थी और एक राय कायम की जाती थी !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया ने बताया की देश में लगभग 7 करोड़ व्यापारी हैं जो लगभग 30 करोड़ लोगों को रोज़गार देते हैं और यदि इनके और इनके परिवारों के वोटों को एक वोट बैंक में तब्दील कर दियाजाए तो चुनाव का माहौल किसी भी तरफ पलटा जा सकता है ! उन्होंने अफ़सोस व्यक्त करते हुए कहा की अब तक व्यापारी वर्ग को सदा उपेक्षित रखा गया और दशकों पुराने उनके गंभीर मुद्दों को सुलझाने की तरफकोई प्रयास नहीं हुआ ! दुर्भाग्य है की किसी भी दल ने कभी भी व्यापारियों को अपनी प्राथमिकता पर नहीं रखा और देश में घरेलू व्यापार को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाये गए ! व्यापारियों कोभाजपा का वोट बैंक समझा जाता है इसलिए अन्य पार्टियां व्यापारियों से दूरी बनाकर रखती हैं उधर दूसरी ओर भाजपा ने कभी व्यापारियों को महत्व नहीं दिया ! देश में व्यापारियों को लगता है की उनकी मजबूत भूमिकाके बावजूद भी राजनैतिक परिदृश्य में वो एक अनाथ बच्चे की तरह हैं !

श्री भरतिया ने कहा की दिल्ली में सीलिंग और किराया कानून व्यापारियों के ज्वलंत मुद्दे हैं वहीँ देश भर में व्यापारियों के लिए ई कॉमर्स से घरेलू व्यापार पर दुष्प्रभाव,  सिंगल ब्रांड रिटेल और कैश एंड कैर्री में एफडीआई सेव्यापारियों को हो रही हानि, घरेलू व्यापार के लिए पृथक से किसी मंत्रालय का न होना , व्यापारियों को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से क़र्ज़ का न मिलना, कर विभाग द्वारा व्यपारिईन का उत्पीड़न, सरकारी विभागिओंमें छाया भ्रष्टाचार , व्यापारियों पर लगे अनेक प्रकार के कानूनों की जटिलता, व्यपारिल बाज़ारों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव और निम्न स्तर का रख रखाव , व्यापारियों और बाज़ारों जहाँ नकद का भारी लेन देन होता हैपर पर्यापत सुरक्षा व्यवस्था का अभाव, देश के घरु व्यापार के लिए किसी नीति का न होना, ईमानदार व्यापारियों को कोई प्रोत्साहन न देना आदि विषय व्यापारियों के सामने परेशानी कड़ी करते है जिससे सुविधापूर्वकव्यापार करने में बड़ी मुश्किलें आती हैं !

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