bloggedEditorspickHomeIndiaNewsPoliticsTop NewsWhats' new
Trending

भाजपा के दलित सासंदों पर चली सबसे ज्यादा कैंची

दिल्ली की एकमात्र अरक्षित सीट पर निर्णय को लेकर सबसे ज्यादा मुश्किल में पार्टी हाई कमान

Spread the love

महेन्द्र अवस्थी,

नई दिल्ली, 30 मार्च 2019, भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक 350 से अधिक लोकसभा उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है जिनमे से लगभग 81% सांसदों पर पुनः भरोसा जताया गया, लेकिन कुछ सीटों पर जीते हुए सांसदों की छुट्टी कर दी गई है | लेकिन जिन सांसदों को टिकट नही दिया गया उसमे सबसे ज्यादा दलित सांसद ही हैं, भाजपा में जीते हुए 49 दलित सांसद है जिनमे से अभी तक घोषित हुई सीटों के अनुसार लगभग 50% से अधिक दलित सांसदों की टिकटों को काटा गया है, अभी तक के आंकड़ों के अनुसार 26 दलित सांसदों को टिकट नहीं दिया गया, माना ये जा रहा है कि दलित सांसदों के टिकट काटने की दो मुख्य वजह हैं, पहली उनके खिलाफ विरोधाभास (एंटी-इन्कम्बंसी) और दूसरा उत्तर-प्रदेश जैसे निर्णायक प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन |

विरोधाभास (एंटी- इन्कम्बंसी) का मुख्य कारण भाजपा के दलित सांसदों का दलितों के लिए कोई ठोस कदम न उठाना और बीते दो साल में केंद्र सरकार के खिलाफ दलितों का आक्रोश भी बढ़ा है, यह भी एक बड़ी वजह है कि नए चेहरे को लाने से कुछ स्थिति बेहतर हो सकती है, इसके अलावा उत्तर-प्रदेश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए सपा-बसपा गठबंधन कहीं न कहीं भाजपा पर भारी पड़ता हुआ दिखाई दे रहा हैं | उत्तर-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की साफ़-सुथरी छवि ही नही बल्कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ ऐसे विकास कार्य प्रदेश में कराये जो अभी तक जनता भूली नही है और दूसरी ओर मायावती की कामकाज के मामले में कड़क छवि |

भाजपा की बची हुई सीटों जिन पर उम्मीदवारों का एलान होना है उसमे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण देश की राजधानी दिल्ली की 7 सीटें हैं, यहाँ भी एक सीट आरक्षित है | मौजूदा सांसद डॉ. उदित राज को गद्दी से हटाने के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं लेकिन जिन दो नामों ने खूब चर्चा बटोरी है उनमे पूर्व भाजपा सांसद अनीता आर्या और पूर्व में मंत्री रह चुके अशोक प्रधान हैं |

माना ये जा रहा है कि उदित राज को भी इस सीट से हटाया जा सकता है और उनकी जगह पर कोई नया चेहरा पार्टी दे सकती है, हालाँकि पार्टी हाईकमान अभी भी उदित राज को इस सीट से लड़ाने के लिए इच्छुक है लेकिन आरएसएस का एक धडा उदित राज को हटाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है | यह तय माना जा रहा है कि भाजपा को इस सीट पर सबसे ज्यादा मशक्कत करनी पड़ेगी, एक तरफ उदित राज ने अपने निजी संगठनों के माध्यम से पिछले 5वर्षों में अपना जनाधार पूरी दिल्ली में मजबूत किया है वहीँ दूसरी ओर काम करने के मामले में भी सबसे अव्वल रहे हैं, सरकारी वेबसाइट के अनुसार सांसद निधि के उपयोग में पहले स्थान पर डॉ. उदित राज है और उसके बाद मीनाक्षी लेखी सहित अन्य 5 सांसद हैं |

Related Articles

Close