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डबल इंजन सरकार के 100 दिन…

'लॉ एंड ऑर्डर' की बदहाली न सुधरी तो फैल हो जाएगी सरकार

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अशोक जैन,स्वतंत्र पत्रकार

राजस्थान में डबल इंजन की सरकार के आज सौ दिन पूरे हुए। हो सकता है सरकार ने सौ से भी ज्यादा कल्याणकारी कार्य किए हों लेकिन कानून व्यवस्था की बदहाली,पुलिस की लूट खसौट ने सरकार पर सवालिया निशान लगाने शुरू कर दिए हैं जिन पर जल्दी ही नियंत्रण नहीं लगा तो संभव है सरकार “फैल” हो जाए।

सरकार के सौ दिनों में प्रदेश के अधिकांश जिलों में पुलिस अधिकारियों की नई जोड़ियां तैनात हुई हैं।पहली बार जिलों में एसपी,एएसपी की जोड़ियां जुर्म,जरायम से निपटने में कम माल बटोरने में जो जुगलबंदी दिखा रही हैं उससे दो बातें सामने आ रही है।एक यह कि जिलों में तैनाती पाए अफसरों ने या मोटा माल चुकाया है या वसूली का हिस्सा ऊपर जा रहा है,दूसरा यह कि इनकी तैनाती में क्षेत्र के उन नेताओं का अहम रोल है जिनकी लोक सभा चुनाव जीतने में नेतृत्व ने महती भूमिका मानी व जिनके दबाव से अफसरों की तैनाती हुई है और अब वे सरकार की ऐसी तेसी फेरने में लगे हैं।

कांग्रेस सरकार बनते ही जिस ताबड़तोड़ तरीके से तबादलों का दौर चला उससे लगा यूं कि पिछली राजे सरकार से आजिज आई प्रदेश की जनता को नई सरकार अपने चुनाव घोषणा पत्र के मुताबिक राहत देने जा रही है लेकिन जो हुआ और हो रहा है वो सब देख रहे हैं।

पिछली सरकार के वक्त बजरी पर अदालती रोक के बावजूद रेत माफिया के पनपने व इनसे पुलिस की वसूली बंद होने की जगह और बढ गई। यही हाल क्रिकेट, दूसरे सट्टे-जुए जैसे सामाजिक अपराध को लेकर है।अधिकांश जिलों में पुलिस के ‘रामलखन’ ने जिस तरह बल्लेबाजी की और कर रहे हैं, उसने बीते तमाम रिकॉर्ड तोड़ डाले।थानों को झगड़े निपटाने की पंचायत में बदल दिया हैं।सुपारी लेकर जायज-नाजायज कब्जे तुड़ाने या हाथ पैर तुड़वाने के मामले भी बढे हैं। प्रदेश के ठंडे जिलों में बदमाशों के हाथों में पिस्टल तमंचे,दियासलाई या होली की पिचकारियां बन गई हैं।डकैती, लूट,राहजनी,झपट्टेबाजी बेहद छोटी घटनाओं में शुमार हैं।एक बात के लिए डबल इंजन सरकार बधाई की पात्र है कि बीते तीन महीनों और सिर पर लोकसभा चुनाव के होते हुए कोई संवेदनशील घटना न हुई।

कुलमिलाकर राजस्थान में जो डबल इंजन है या तो उनकी दिशाएं विपरीत हैं या फिर यह “लूज शंटिंग” कर दिए गए हैं। लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति को ठीक करना ही सरकार की प्राथमिकता होनी जरूरी है।

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