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49 वें भास्कर राव सम्मेलन नृत्य एवं संगीत सम्मेलन में नरेंद्र नाथ धर के खनकते सरोद एवं गुरू कनका सुधाकर की खूबसूरत भरतनाट्यम प्रस्तुति से सम्मेलन का समापन

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49 वें भास्कर राव सम्मेलन के आखिरी दिन सरोद एवं भरतनाट्यम नृत्य की खूबसूरत पेशकश टैगोर थियेटर में की गई । आज की दो प्रस्तुतियों में पहले कोलकाता से आए नरेंद्र नाथ धर ने सरोद वादन प्रस्तुत किया । उपरांत कनका सुधाकर ने अपने समूह के साथ भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत किया ।
पंडित नरेंद्र नाथ धर सेनिया घराने के प्रसिद्ध सरोद वादकों में से एक है । कोलकाता में जन्में पंडित नरेंद्र नाथ धर ने प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता श्री निमाई चंद धर से प्राप्त की । उपरांत श्री समेंद्र नाथ सिकंदर तथा पंडित राधिका मोहन मैत्रा से सरोद की गहराईयों को सीखा । इसके उपरांत उस्ताद अमज़द अली खां साहिब से सरोद की शिक्षा प्राप्त करके सरोद के क्षेत्र में आज एक जाना माना नाम बन चुके हैं । इन्होंने भी देश विदेश में बहुत सी प्रस्तुतियां देकर नाम कमाया है ।
गुरू कनका सुधाकर ने गुरू वी.पी.धन्नजय एवं शांता धन्नजय से नृत्य की शिक्षा प्राप्त की है और अभिनय पक्ष की शिक्षा गुरू कलानिधि नारायण से प्राप्त की है । दिल्ली शासन से रिटायर्ड फाॅरमिस्सिट है । इन्होंने सुनैना नाम एक संस्था का स्थापन भी किया है जिससे यह कला के विकास एवं प्रसार प्रचार हेतु कार्य कर रही है । इन्होंने बहुत से सम्मान अर्जित किए है तथा साथ ही देश ही नहीं विदेशों में भी भारतीय कला का बखूबी प्रदर्शन करके प्रशंसा अर्जित की है । इसके अलावा इन्होंने लड़कियों के विकास में भारतीय कलाओं के लाभदायक प्रभावों पर एक खोज भी की है और सात साल के अध्ययन के पश्चात एक किताब ‘‘इंडियन क्लासिकल डांसिस दी थैरेपेटिक अडवांटिजस’’ प्रकाशित की है।
आज के कार्यक्रम की शुरूआत सरोद वादन से हुई जिसमें पंडित नरेंद्र नाथ धर ने राग पूर्वी से कार्यक्रम की शुरूआत की । जिसमें उन्होंने आलाप,जोड़ एवं झाला की सुंदर प्रस्तुति दी । उपरांत दो सुंदर गतों का प्रदर्शन करके पंडित नरेंद्र नाथ धर ने खूब प्रशंसा लूटी ।कार्यक्रम का समापन पंडित धर ने राग मिश्र काफी में निबद्ध होरी से किया । इनके साथ मंच पर श्री दुर्जय भौमिक ने तबले पर बखूबी संगत की ।
कार्यक्रम के दूसरे भाग में गुरू कनका सुधाकर एवं उनके समूह ने भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । इनके समूह में अपराजिता शर्मा,तानया गंभीर एवं उपासना गगनेजा ने प्रस्तुति दी । कार्यक्रम की शुरूआत नाट्यांजलि से हुई जिसमें इन्होंने सभी देवी देवताओं की स्तुति नृत्य के माध्यम से पेश की । इस भक्तिमयी प्रस्तुति के पश्चात इन्होंने भरतनाट्यम के एक विशेष अंग अल्लारिपु का प्रदर्शन किया जिसमें हनुमान चालीसा को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करके इस समूह ने खूब तालियां बटोरी । इस विशेष नृत्य को गुरू कनका ने निर्देशित किया है । इसके उपरांत गुरू कनका सुधाकर की एकल नृत्य प्रस्तुत किया गया । जिसमें इन्होंने वात्सल्य पदम प्रस्तुत किया । जिसमें इन्होंने कृष्ण और यशोदा के अन्नय एवं शुद्ध प्रेम का प्रदर्शन किया गया । कार्यक्रम के अगले भाग में लघु वरनम प्रस्तुत किया गया । जिसमें भगवान के दशावतार का वर्णन देखकर दर्शक रोमांचित हो गए । इसे भी गुरू कनका द्वारा निर्देशित किया गया है । भरतनाट्यम के अभिनय अंग पर विशेष पकड़ रखने वाले गुरू कनका की शिष्याओं ने बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर अपने कठिन रियाज़ को प्रदर्शित किया ।
कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया ।

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